सीएम धामी ने बताया कि परिवार रजिस्टर में बड़ी अनियमितताएं हुई हैं। जो राज्य के लिए ठीक नहीं है। खासकर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी के कोटद्वार, टिहरी के मुनिकीरेती, चंपावत के बनबसा, टनकपुर आदि क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ा है।
प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों में, अवैध बसावट और फर्जीवाड़े की वजह से जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब परिवार रजिस्टर में नाम आसानी से नहीं जुड़ेगा। इसके लिए सरकार नई नियमावली बनाने जा रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जाएगा। माल्टा महोत्सव में पहुंचे सीएम धामी ने बताया कि परिवार रजिस्टर में बड़ी अनियमितताएं हुई हैं। जो राज्य के लिए ठीक नहीं है। खासकर देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी के कोटद्वार, टिहरी के मुनिकीरेती, चंपावत के बनबसा, टनकपुर आदि क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ा है।
कुछ लोग ऐसी जगहों पर बस गए हैं जहां, उनका नामो निशान नहीं था। सीएम ने कहा कि वह किसी भी कीमत पर भावी पीढ़ी को असुरक्षित उत्तराखंड नहीं देंगे। वह उनका भविष्य सुरक्षित रखना चाहते हैं, इसलिए कोई भी खतरा मोल नहीं लेना चाहते। शासन के अधिकारियों के मुताबिक परिवार रजिस्टर में दर्ज नाम में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। कई में अधिकारियों के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज होते जा रहे हैं और कोई जांच पड़ताल भी नहीं हो रही।
इसकी एक वजह यह है कि वर्तमान में जो नियम है वह बहुत कमजोर हैं और स्पष्ट भी नहीं हैं। वर्तमान नियम में परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने के लिए निवासी होने की बात कही गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितने समय से निवासी होना चाहिए। इसके लिए इस नियम में बदलाव के साथ ही निवासी की परिभाषा को स्पष्ट किया जाएगा।
इसके अलावा सेवा के अधिकार अधिनियम के तहत तीन दिन के भीतर परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करना होता है। इसे भी ठीक से जांच न हो पाने की एक वजह बताया जा रहा है। ठीक से जांच पड़ताल के बाद ही परिवार रजिस्टर में नाम जुड़ सकें इसके लिए परिवार रजिस्टर में नाम जोड़ने की समय सीमा को बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा परिवार रजिस्टर के प्रपत्र में कुछ अन्य कॉलम बढ़ाए जा सकते हैं।
जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ने की एक वजह यह भी
स्थानीय व्यक्ति के नाम पर जगह-जगह प्लाॅटिंग हो रही है। यह भी एक वजह है कि उन क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय संतुलन बिगड़ता जा रहा है।