भावना पांडे से ठगी का मामला: पद मिला न टिकट, जेब गई कट; अभी शर्म लिहाज और डर के साए में कई और नेता

खुद को सक्रिय कांग्रेसी बताने वालीं भावना पांडे तो अपने साथ हुई ठगी की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंच गईं। जबकि, कई अभी ऐसे हैं जो शर्म लिहाज के दायरे को तोड़ नहीं पा रहे हैं।

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आए तो सत्तारूढ़ पार्टी में जश्न का माहौल था। इन नतीजों में कांग्रेस के पास जश्न मनाने जैसा कुछ नहीं था लेकिन एकाएक हलचल शुरू हो गई। खबर पता चली कि कोई यहां आया और टिकट व पद बांटने के नाम पर पार्टी के नेताओं को ठगकर चला गया।

खुद को सक्रिय कांग्रेसी बताने वालीं भावना पांडे तो अपने साथ हुई ठगी की शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंच गईं। जबकि, कई अभी ऐसे हैं जो शर्म लिहाज के दायरे को तोड़ नहीं पा रहे हैं। कुछ को शायद यह भी लग रहा है कि रुपयों का हिसाब कहीं एजेंसियों ने मांग लिया तो अलग संकट खड़ा हो जाएगा। दरअसल, देश में अगले विधानसभा चुनावों में उत्तराखंड की भी बारी है। इसे लेकर पार्टियों के बड़े नेता अपने नेताओं की सक्रियता को परखने के लिए दौरे भी कर चुके हैं। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा भी पिछले दिनों नेताओं की तैयारियों की टोह लेने के लिए आई थीं। जाहिर है कांग्रेस पार्टी में अंदरखाने दावे ठोकने की मुहिम शुरू हो गई है। कई नेताओं ने मेले पर्वों की शुभकामनाएं देने के लिए पोस्टर चस्पा कर दिए हैं।


नेता कितनी तैयारी कर रहे हैं इसका नतीजा तो सालभर बाद चुनाव परिणामों से ही पता चल पाता है लेकिन एक व्यक्ति है जो अपनी पौ बारह इन तैयारियों के बीच ही कर गया। पंजाब का गौरव इन सब गतिविधियों पर निगरानी कर रहा था। बताया जा रहा है कि उसने कई नेताओं को पार्टी में ऊंचे पद दिलाने का झांसा दिया। इसके अलावा प्रमुख विधानसभाओं के टिकट दिलाने की बात भी कही। कोई कुछ कहता तो राहुल गांधी की नाराजगी की बात कहते हुए उसे चुप करा देता।

राजपुर थाने में भावना पांडे तो 25 लाख रुपये की ठगी की शिकायत लेकर पहुंच गईं लेकिन कई ऐसे नेता हैं जिनसे इस रकम से कई गुना तक गौरव नाम के इस ठग ने ठगे हैं। कुछ नेताओं या नेता बनने की तैयारी कर रहे लोगों से सवा करोड़ और दो करोड़ रुपये तक ठगे गए हैं। अब देखने वाली बात यह है कि ये नेता खुद पुलिस के पास पहुंचेंगे या फिर पुलिस ही गौरव के फोन कॉल डिटेल से उन तक पहुंचेगी। बात बड़ी रकम गंवाने की है तो रकम का हिसाब भी देना पड़ सकता है। शायद यही सोच अब इन नेताओं को यह कदम उठाने से रोक रही है।

खाली हाथ को सिरदर्द दे गया पंजाब का ठग

पांच राज्यों में देश की सबसे पुरानी पार्टी को पहले से ज्यादा मायूसी हाथ लगी है। एक तरह से हाथ खाली हाथ ही रहा। ऊपर से इस खाली हाथ को उत्तराखंड में पंजाब का यह ठग सिरदर्द दे गया। असल सिरदर्द तो कद्दावार नेताओं को मिला जिनका नाम राजनीतिक गलियारों में इस मामले से जोड़कर चर्चाओं में आ रहा है। कोई इसे दबे होठ साजिश बता रहा है तो कुछ इस मामले से खुद को अलग ही रखने की अपील कर रहे हैं। उधर, रकम गंवाने वाले इन नेताओं के सामने स्थिति ऐसी है कि न उगलते बन रहा है न खाते। बात उगलेंगे तो शायद कई नेताओं के नाम सामने आ जाएंगे। छिपाएंगे तो शायद अपराध का न्याय नहीं पाएंगे।

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