अब पहाड़ के निकायों में शुरू होंगे आरोग्य मंदिर, पहले पुनर्निर्धारण करेगा शहरी विकास विभाग

अब पहाड़ के निकायों में आरोग्य मंदिर शुरू होंगे। आरोग्य मंदिरों को शुरू करने से पहले शहरी विकास विभाग पुनर्निर्धारण करेगा। ब्रिडकुल के साथ इस पर जल्द अनुबंध होगा।

उत्तराखंड के 114 अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का संचालन अब सुविधा वाले मैदानी जिलों के बजाए उन पर्वतीय नगर निकायों में होगा, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं अपेक्षाकृत कमतर हैं। इसके लिए शासन स्तर से निकायों के हिसाब से पुनर्निर्धारण किया जाएगा।

पिछले दिनों पुरानी कंपनी से अनुबंध खत्म होने के बाद शहरी विकास विभाग ने नगर निकायों को आरोग्य मंदिरों के संचालन का जिम्मा अस्थायी तौर पर दे दिया है। कुछ निकायों ने संचालन शुरू कर दिया है लेकिन कई जगहों पर नहीं हो रहा है। इसके लिए केंद्र से बजट मिला हुआ है। संचालन की जिम्मेदारी के लिए ब्रिडकुल का चयन किया गया है, जिससे अनुबंध करने की प्रक्रिया गतिमान है।

अभी तक आरोग्य मंदिरों का संचालन देहरादून, हरिद्वार जैसे उन मैदानी निकायों में भी हो रहा था, जहां पहले ही स्वास्थ्य सुविधाएं मौजूद हैं। शहरी विकास विभाग ने तय किया है कि इन आरोग्य मंदिरों को प्रदेश के उन पर्वतीय नगर निकायों तक पहुंचाया जाएगा, जहां अपेक्षाकृत स्वास्थ्य सुविधाएं कम हैं। ऐसे तमाम नए नगर पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं में यह मंदिर मजबूत जोड़ बन सकते हैं।

लिहाजा, नए वित्त वर्ष के लिए जो प्रक्रिया वर्तमान में गतिमान है, उससे पूर्व स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर सभी आरोग्य मंदिरों का पुनर्निर्धारण किया जाएगा। हो सकता है कि देहरादून या हरिद्वार नगर निगम क्षेत्रों में संचालित ये आरोग्य मंदिर बंद कर दिए जाएं।

पहाड़ के कई नगर निकाय ऐसे हैं, जहां आरोग्य मंदिर कारगर हो सकते हैं। हम स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर आरोग्य मंदिरों का पुनर्निर्धारण इसी आधार पर करने जा रहे हैं ताकि ब्रिडकुल जब काम करे तो उसी अनुसार पहाड़ तक स्वास्थ्य सुविधाएं और मजबूत बनाए। -नितेश झा, सचिव, शहरी विकास

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