भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम में उत्तराखंड के पूर्व सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी अहम जिम्मेदारी मिली है। उनके साथ उत्तराखंड के कुल चार नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह दी गई है। सीएम-सांसद हो या संगठन का कोई भी दायित्व तीरथ सिंह रावत हर भूमिका में खरे उतरे।
दो साल के बाद तीरथ सिंह रावत फिर सक्रिय राजनीति में बतौर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लौटे हैं। 2022 में पांच माह का सीएम बनने के बाद से उन्होंने अपना सांसद का कार्यकाल जरूर पूरा किया लेकिन 2024 के चुनाव में उनका टिकट कटने के बाद से कोई अहम जिम्मेदारी नहीं थी। वहीं, तीन अन्य चेहरों सांसद अनिल बलूनी, राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री महेंद्र पांडे, राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह संयोजक आलोक भट्ट के अपने अनुभव के आधार पर नई टीम में जगह दी गई है।
तीरथ की खास बात ये है कि उन्होंने संघ के प्रचारक से लेकर सरकार के सर्वोच्च पद तक अपना योगदान दिया है। संगठन ने जब भी उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी, उन्होंने बखूबी निभाई। तीरथ का राजनीतिक कॅरिअर उपलब्धियों से भरा पड़ा है। हालांकि मुख्यमंत्री के तौर पर उनका कार्यकाल जरूर विवादों में घिरा लेकिन बाकी जिम्मेदारियों में वे पार्टी के मानकों पर खरे उतरे। तीरथ इससे पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर बतौर राष्ट्रीय सचिव अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं।
हर भूमिका में खरे उतरे तीरथ
तीरथ सिंह रावत का जन्म एक अप्रैल 1964 को पौड़ी गढ़वाल के सीरों, पट्टी असवालस्यूं में हुआ था। उनके पिता का नाम कलम सिंह रावत है। वे वर्ष 1983 से 1988 तक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक रहे। 1997 में उत्तर प्रदेश विधान परिषद् के सदस्य निर्वाचित हुए तथा विधान परिषद् में विनिश्चय संकलन समिति के अध्यक्ष बनाए गए। इससे पूर्व वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे।
गढ़वाल विवि में छात्रसंघ अध्यक्ष, छात्र संघ मोर्चा (उत्तर प्रदेश) में प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उत्तराखंड के संगठन मंत्री और राष्ट्रीय मंत्री पद पर रहे। भारतीय जनता युवा मोर्चा (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रहे। गढ़वाल सांसद होने के साथ ही वे भाजपा के राष्ट्रीय सचिव पद पर भी आसीन रहे।
2019 में पौड़ी से सांसद चुनने के साथ ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश में चुनाव प्रभारी की भूमिका भी बखूबी निभाई। इतिहास के आईने से देखें तो वर्ष 2000 में नवगठित उत्तराखंड के प्रथम शिक्षा मंत्री बनने को गौरव हासिल है। इसके बाद 2007 में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड के प्रदेश महामंत्री चुने गए। वर्ष 2012-2017 के बीच तीरथ चौबट्टाखाल से विधायक रहे। वर्ष 2013 में उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने। त्रिवेंद्र सिंह रावत के बाद संगठन ने उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी। हालांकि करीब पांच माह के बाद विवादों के बीच उन्हें हटा दिया गया। अब उन्हें भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की नई जिम्मेदारी मिली है।
बलूनी का कद बरकरार
गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी का कद संगठन ने बरकरार रखा है। बलूनी को मीडिया संयोजक के तौर पर लंबा अनुभव है। लिहाजा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उन पर पुन: राष्ट्रीय मीडिया संयोजक के तौर पर भरोसा जताया है।
महामंत्री संगठन जैसी जिम्मेदारी संभाल चुके आलोक भट्ट
भाजपा की राष्ट्रीय टीम में नए राष्ट्रीय सोशल मीडिया सह संयोजक आलोक भट्ट का भी लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है। वे हिमाचल में लंबे समय तक भाजपा के महामंत्री संगठन की अहम भूमिका निभा चुके हैं। अब उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह दी गई है। इसी प्रकार, महेंद्र पांडे का भी लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है।
मैं अपने राष्ट्रीय नेतृत्व का धन्यवाद करना चाहूंगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मुझ पर जो विश्वास जताया और जो जिम्मेदारी दी है, मैं उस पर खरा उतरूंगा। अपनी पार्टी की जो रीति-नीति है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो विजन है, उसे आगे बढ़ाना है। 2047 तक विकसित भारत की ओर हम बढ़ेंगे। जहां भी जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे बखूबी निभाऊंगा। आज देश आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारा विश्व में एक स्थान बन रहा है। हम 2027 की चुनौती को भी स्वीकार करते हुए आगे बढ़ेंगे और जीत हासिल करेंगे। हमारा काम लगातार समाज, देशहित में निरंतर होता है। कार्यकर्ता पूर्ण रूप से समर्पित भाव से देश के लिए लगा हुआ है तो निश्चित तौर पर हम जीतेंगे। -तीरथ सिंह रावत, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा