पदोन्नति की प्रक्रिया में एक नई अड़चन ने शिक्षा विभाग के सामने चुनौती बढ़ा दी है। टीईटी उत्तीर्ण शिक्षक भी पदोन्नति का लाभ नहीं ले पा रहे हैं, क्योंकि प्रक्रिया आगे बढ़ने पर बड़ी संख्या में शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होने की आशंका है। विभाग अब नियमों और वरिष्ठता के बीच संतुलन बनाने की कवायद में जुटा है।
सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के टीईटी न होने से उनकी पदोन्नति नहीं हो पा रही है, लेकिन जिन शिक्षकों ने टीईटी किया है विभाग में उनकी भी पदोन्नति लटक गई है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक इन शिक्षकों की पदोन्नति किए जाने से इसमें वरिष्ठता आड़े आ रही है।
शिक्षा विभाग में चार हजार से अधिक सहायक अध्यापक एलटी प्रवक्ता के पद पर पदोन्नति नहीं हो पा रहे हैं। विभाग की ओर से अब सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए आदेश जारी किया गया है कि शिक्षकों को टीईटी द्वितीय करना अनिवार्य है। पदोन्नति और सेवा में बने रहने के लिए एलटी शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है।
राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री रमेश पैन्यूली के मुताबिक सहायक अध्यापक एलटी को यूपी की तर्ज पर टीईटी से छूट दी जानी चाहिए। कोई भी शासनादेश पूर्वगामी नहीं होता। पूर्व की तिथि से उसे लागू नहीं किया जा सकता। सरकार शिक्षकों के टीईटी के मामले में अध्यादेश लाए या फिर शीघ्र कोई अन्य रास्ता निकाले।
टीईटी पास शिक्षकों की पदोन्नति से बिना टीईटी किए शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित होगी। इनके मामले का निपटारा न होने तक पदोन्नति नहीं की जा सकती। -विनोद सिमल्टी, निदेशक माध्यमिक शिक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति एवं सेवा में बने रहने के लिए टीईटी को अनिवार्य किया हुआ है, लेकिन जो शिक्षक टीईटी हैं, विभाग में उनकी भी पदोन्नति नहीं हो पा रही है। बिना टीईटी किए शिक्षक इनसे वरिष्ठ हैं, ऐसे में वरिष्ठता को दरकिनार कर विभाग पदोन्नति नहीं कर पा रहा है।