खालिद, सुमन और साबिया के खिलाफ सीबीआई ने दाखिल की चार्जशीट, जानें पूरा मामला

गत 21 सितंबर को यूकेएसएसएससी ने स्नातक स्तरीय परीक्षा कराई थी। परीक्षा के दौरान पेपर का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इसके बाद प्रदर्शन भी हुए और जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक मामले में सीबीआई ने सोमवार को नकल करने वाले अभ्यर्थी खालिद, उसकी बहन साबिया और प्रश्नपत्र हल करने वाली सहायक प्रोफेसर सुमन के खिलाफ स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। इस मामले में सीबीआई ने पुलिस की प्राथमिकी के आधार पर 22 अक्तूबर को सीबीआई देहरादून शाखा में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी। ये तीनों आरोपी इस वक्त न्यायिक अभिरक्षा में हैं। इस प्रकरण में सीबीआई की विवेचना फिलहाल जारी रहेगी।

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) ने 21 सितंबर को स्नातक स्तरीय परीक्षा आयोजित कराई थी। प्रदेश के कई सेंटरों पर हजारों अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। इस बीच परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही एक प्रश्नपत्र का फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इसमें कुछ प्रश्न हल किए हुए थे। युवाओं ने इस मामले में पेपर लीक होने का आरोप लगाया तो पुलिस प्रशासन भी हरकत में आया। इसके बाद 22 सितंबर को रायपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। पता चला कि पेपर हरिद्वार के बहादरपुर जट गांव के सेंटर से बाहर आया है।

पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद खालिद नाम के अभ्यर्थी को गिरफ्तार कर लिया। पता यह भी चला कि उसने यह पेपर अपनी बहन साबिया को भेजा था जिसने हल कराने के लिए टिहरी गढ़वाल की प्रोफेसर सुमन को भेजा। सुमन ने कुछ प्रश्न हल किए और बाद में इस पेपर को बेरोजगार संघ के एक नेता को व्हाट्सएप के माध्यम से भेज दिया। पुलिस ने साबिया को गिरफ्तार किया लेकिन सुमन को गिरफ्तार नहीं किया था। युवा इस मामले में सीबीआई जांच की मांग के लिए आंदोलन करने लगे तो मुख्यमंत्री ने सीबीआई जांच की संस्तुति कर दी।

इसके बाद सीबीआई ने 22 अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज कर सुमन को भी गिरफ्तार कर लिया। अब सीबीआई ने करीब दो महीने की जांच के बाद तीनों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई की ओर से जारी प्रेसनोट में इसकी जानकारी दी गई है। चार्जशीट प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित साधनों के प्रयोग की रोकथाम अधिनियम-2023 और बीएनएस की धारा 61(2)(आपराधिक षड्यंत्र), 238 (अपराध के साक्ष्यों को मिटाना), 241 (इलेक्ट्रॉनिक व अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों को छिपाना) और 318 (4)(धोखाधड़ी) की धाराओं में दाखिल की गई है।

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