हेमंत ईश्वर शर्मा ने बीटीसी फंड डॉट आईएस नाम की आईएसलैंड में पंजीकृत वेबसाइट के माध्यम से लोगों से निवेश कराया था। ठगी का यह खेल उसने 2014-15 में शुरू किया था। उसके खिलाफ राजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसके आधार पर ईडी ने भी जांच शुरू की।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बिटक्वाॅइन में निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये ठगने के आरोपी दून के हेमंत ईश्वर शर्मा की 8.54 करोड़ रुपये की चल अचल संपत्तियों को अटैच किया है। इससे पहले उसकी 4.56 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच किया जा चुका है। ईश्वर शर्मा वर्तमान में सुद्धोवाला जेल में बंद है।
ईडी से मिली जानकारी के अनुसार हेमंत ईश्वर शर्मा ने बीटीसी फंड डॉट आईएस नाम की आईएसलैंड में पंजीकृत वेबसाइट के माध्यम से लोगों से निवेश कराया था। ठगी का यह खेल उसने 2014-15 में शुरू किया था। उसके खिलाफ राजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसके आधार पर ईडी ने भी जांच शुरू की। इसी फर्जी योजना से जुड़े मामले में दिनेशपुर थाना, जिला ऊधमसिंह नगर में भी हेमंत ईश्वर शर्मा और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। शर्मा ने निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच दिया और यह झूठा दावा किया कि कंपनी से कई विदेशी नागरिक जुड़े हैं, जिससे योजना को विश्वसनीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थित बताया जा सके।
ईडी के अनुसार जब उसने लोगों का भरोसा जीत लिया और बड़ी मात्रा में बिटक्वाॅइन एकत्र कर लिए। इसके बाद उसने अचानक वेबसाइट बंद कर दी, जिससे निवेशकों के साथ धोखा हुआ और उनका धन फंस गया। ब्लॉकचेन विश्लेषण में लगभग 856.23 बिटक्वाॅइन (वर्तमान मूल्य लगभग 200 करोड़ रुपये) की अपराध से अर्जित आय का पता चला। जांच में सामने आया कि इन बिटक्वाॅइन को विभिन्न क्रिप्टो एक्सचेंजों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग कर अचल संपत्तियां खरीदने, वाहन लेने और अपने आवास के नवीनीकरण में इस्तेमाल किया गया। ईडी की जांच में यह भी पाया गया कि हेमंत शर्मा के पास वेबसाइट से प्राप्त धन के अलावा आय का कोई अन्य वैध स्रोत नहीं था।
बंगला और दो बीएमडब्ल्यू कार
आय का कोई और स्रोत न होने पर भी वह बेहद आलीशान जीवन जी रहा था। बिना किसी औपचारिक आय के उसने दो बीएमडब्ल्यू कारें, देहरादून के एक पॉश इलाके में बंगला और देहरादून व आसपास के क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियां खरीदी हैं। गत 20 मई को ईडी ने उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत (प्रोसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल की थी, जिस पर न्यायालय ने 13 जुलाई को संज्ञान लिया।