देहरादून, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, ऊधमसिंह नगर, चंपावत और टिहरी जिले के कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
उत्तराखंड में दूसरे दिन भी भारी बारिश की संभावना है। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से राज्य के अधिकांश जिलों में भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज दौर की बौछारें पड़ने का पूर्वानुमान जारी किया है।
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार देहरादून, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, ऊधमसिंह नगर, चंपावत और टिहरी जिले के कुछ क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन क्षेत्रों में गरज के साथ आकाशीय बिजली चमकने की संभावना है। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी कहीं-कहीं तेज दौर की बारिश होने के आसार हैं।
मौसम वैज्ञानिकों ने हिदायत देते हुए कहा कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और नदी-नालों के किनारे जाने से परहेज करें। खासकर पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और मौसम संबंधी अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है। आने वाले दिनों की बात करें तीन अगस्त तक प्रदेश भर में मौसम का मिजाज कुछ ऐसा ही रहेगा।
मालदेवता में सबसे अधिक 233 एमएम हुई बारिश
पिछले 24 घंटों में उत्तराखंड के कई हिस्सों में मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी वर्षा दर्ज की गई, जिससे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया और भूस्खलन की घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
सबसे अधिक वर्षा देहरादून के मालदेवता क्षेत्र में 233.0 एमएम दर्ज की गई, जो इस अवधि की सर्वाधिक वर्षा रही। इसके अलावा हाथीबड़कला में 194.5, जौलीग्रांट में 172.2 और मसूरी में 163.0 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। पर्वतीय क्षेत्रों में भी बारिश का जोर देखने को मिला। ऊखीमठ में 120.0, डीडीहाट में 102.0 और धनोल्टी में 88.0 एमएम वर्षा दर्ज की गई। वहीं हल्द्वानी और थल में 83.0, चमोली में 80.60 और तेजम में 73.0 एमएम बारिश हुई। अन्य क्षेत्रों की बात करें तो बेरिनाग में 72.0, कीर्तिनगर में 70.0, नरेंद्रनगर में 63.0 और उत्तरकाशी मुख्यालय में 61.0 एमएम वर्षा दर्ज की गई। ऋषिकेश में 61.4, जखोली में 58.0 और सितारगंज में 57.0 एमएम बारिश हुई। इसके अलावा भटवाड़ी में 55.0, कनालीछीना में 53.3, कपकोट में 53.0, जोशीमठ में 51.0, देवलथल और बागेश्वर में 50.0 एमएम वर्षा रिकॉर्ड की गई। लगातार हो रही बारिश के चलते प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और निचले इलाकों में जलभराव की आशंका को देखते हुए आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
बारिश से गिरा पारा, उमस से मिली राहत
सोमवार शाम से शुरू हुआ बारिश का सिलसिला मंगलवार को भी जारी रहा। इसका सीधा असर मैदानी इलाकों के तापमान में देखने को मिला। देहरादून की बात करें तो यहां दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से 2.7 डिग्री गिरावट के साथ 22.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले सामान्य तापमान में दो से चार डिग्री तक की बढ़ोतरी देखने को मिल रही थी। वहीं, न्यूनतम तापमान 23.4 डिग्री के साथ सामान्य रहा। पर्वतीय इलाकों में यह अंतर ज्यादा देखने को मिला। जबकि मैदानी इलाकों में पारा गिरने से गर्मी और उमस से राहत मिली।
उत्तराखंड में 111 मार्ग बंद
राज्य में भूस्खलन समेत अन्य कारणों तीन एनएच व छह राज्यमार्ग समेत 111 मार्ग बंद हैं। इनमें सबसे अधिक ग्रामीण मार्ग 76 बंद हैं। सबसे अधिक देहरादून जिला प्रभावित है, यहां पर एक एनएच और पांच एसएच समेत 27 सड़कें बंद हैं। अल्मोड़ा में दो, बागेश्वर में आठ, चमोली में 12 मार्ग बंद हैं। नैनीताल में एक मुख्य जिला मार्ग समेत सात मार्ग बंद हैं। पौड़ी में छह और सीमांत जिला पिथौरागढ़ में एनएच, एक बार्डर रोड समेत 16 सड़कें बंद हैं। रुद्रप्रयाग में पांच, टिहरी में 17 और उत्तरकाशी में 11 सड़कें बंद हैं।
खतरे के स्तर के पास पहुंचा नदियों का जल स्तर
बारिश के चलते नदियों का जल स्तर भी बढ़ा है। रुद्रप्रयाग में मंदाकिनी और अलकनंदा नदी का जल स्तर खतरे के जल स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। चमोली में पिंडर नदी का खतरे के स्तर चार मीटर कम रह गया है। पिथौरागढ़ में काली, गोरी और सरयू नदी का जल स्तर भी खतरे के जल स्तर के पास पहुंच गया।